हिन्दी अक्षर-माला

 हिन्दी-वर्णमाला

देवनागरी की वर्णमाला में १२ स्वर और ३४ व्यंजन हैं। शून्य या एक या अधिक व्यंजनों और एक स्वर के मेल से एक अक्षर बनता है।

स्वर:

निम्नलिखित स्वर आधुनिक हिन्दी (खड़ी बोली) के लिये दिये गये हैं। संस्कृत में इनके उच्चारण थोड़े अलग होते हैं।

वर्णाक्षर “प” के साथ मात्रा IPA उच्चारण “प्” के साथ उच्चारण IAST समतुल्य हिन्दी में वर्णन
/ ə / / pə / a बीच का मध्य प्रसृत स्वर
पा / α: / / pα: / ā दीर्घ विवृत पश्व प्रसृत स्वर
पि / i / / pi / i ह्रस्व संवृत अग्र प्रसृत स्वर
पी / i: / / pi: / ī दीर्घ संवृत अग्र प्रसृत स्वर
पु / u / / pu / u ह्रस्व संवृत पश्व वर्तुल स्वर
पू / u: / / pu: / ū दीर्घ संवृत पश्व वर्तुल स्वर
पे / e: / / pe: / e दीर्घ अर्धसंवृत अग्र प्रसृत स्वर
पै / æ: / / pæ: / ai दीर्घ लगभग-विवृत अग्र प्रसृत स्वर
पो / ο: / / pο: / o दीर्घ अर्धसंवृत पश्व वर्तुल स्वर
पौ / ɔ: / / pɔ: / au दीर्घ अर्धविवृत पश्व वर्तुल स्वर
<कुछ भी नही> <कुछ भी नही> / ɛ / / pɛ / <कुछ भी नहीं> ह्रस्व अर्धविवृत अग्र प्रसृत स्वर

संस्कृत में  दो स्वरों का युग्म होता है और “अ-इ” या “आ-इ” की तरह बोला जाता है। इसी तरह  “अ-उ” या “आ-उ” की तरह बोला जाता है।

इसके अलावा हिन्दी और संस्कृत में य

  •  — आधुनिक हिन्दी में “रि” की तरह
  •  — केवल संस्कृत में
  •  — केवल संस्कृत में
  •  — केवल संस्कृत में
  • अं — आधे न् , म् , ङ् , ञ् , ण् के लिये या स्वर का नासिकीकरण करने के लिये
  • अँ — स्वर का नासिकीकरण करने के लिये
  • अः — अघोष “ह्” (निःश्वास) के लिये
  •  और  — इनका उपयोग मराठी और और कभी-कभी हिन्दी में अंग्रेजी शब्दों का निकटतम उच्चारण तथा लेखन करने के लिये किया जाता है।

व्यंजन:

जब किसी स्वर प्रयोग नहीं हो, तो वहाँ पर ‘अ’ (अर्थात श्वा का स्वर) माना जाता है। स्वर के न होने को हलन्त्‌ अथवा विराम से दर्शाया जाता है। जैसे कि क्‌ ख्‌ ग्‌ घ्‌।

जिन वर्णो को बोलने के लिए स्वर की सहायता लेनी पड़ती है उन्हें व्यंजन कहते है।

दूसरे शब्दो में- व्यंजन उन वर्णों को कहते हैं, जिनके उच्चारण में स्वर वर्णों की सहायता ली जाती है।

जैसे- क, ख, ग, च, छ, त, थ, द, भ, म इत्यादि।

                                                  हिन्दी अक्षर-माला

हिन्दी वर्णमाला के समस्त वर्णों को व्याकरण में दो भागों में विभक्त किया गया हैस्वर और व्यंजन। वर्णमाला स्वर, , , , , , , , , , अनुस्वारअं विसर्ग: व्यंजन, , , , , , , , , , , , , ड़, ढ़ , , , , , ,, , , , , , , , गृहीतज़, फ़, संयुक्त व्यंजनक्ष, त्र, ज्ञ, श्र स्वर जिन वर्णों हिन्दी अक्षरमाला उच्चारण करते समय साँस, कंठ, तालु आदि स्थानों सेहिन्दी अक्षर-माला बिना रुके हुए निकलती है, उन्हेंस्वरकहा जाता है। व्यंजन जिन वर्णों का उच्चारण करते समय साँस कंठ, तालु आदि स्थानों से रुककर निकलती है, उन्हेंव्यंजनकहा जाता है। प्राय: व्यंजनों का उच्चारणहिन्दी अक्षर-माला स्वर की सहायता से किया जाता है। हिन्दी वर्णमाला के समस्त वर्णों को व्याकरण में दो भागों में विभक्त किया गया हैस्वर और व्यंजन।हिन्दी वर्णमाला पंचमाक्षर अर्थात वर्णमाला में किसी वर्ग का पाँचवाँ व्यंजन।हिन्दी अक्षर-माला जैसे– ‘‘, ‘‘, ‘आदि।हिन्दी अक्षर-माला आधुनिक हिन्दी में पंचमाक्षरों का प्रयोग बहुत कम हो गया है और इसके स्थान पर अब बिन्दी () का प्रचलन बढ़ गया है। विशेष :- भाषा की सार्थक इकाई वाक्य हैं।

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